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आम आदमी को झटका: खुदरा के बाद अब थोक महंगाई दर भी बढ़ी


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थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आधिकारिक आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2020 में 3.1 फीसदी पर आ गई है। साल 2019 की समान अवधि में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.76 फीसदी थी। इससे पिछले महीने दिसंबर में यह 2.59 फीसदी थी। प्याज और आलू जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते यह इजाफा हुआ है। 
 

लगातार तीन महीनों से हो रहा इजाफा

वहीं नवंबर में यह 0.58 फीसदी पर थी। अक्तूबर में यह 0.16 फीसदी थी, सितंबर में 0.33 फीसदी और अगस्त में यह 1.17 फीसदी थी। यानी लगातार तीन महीनों से इसमें इजाफा हो रहा है। इस दौरान गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दिसंबर के 2.32 फीसदी से लगभग तीन गुना बढ़कर 7.8 फीसदी हो गई। खाद्य वस्तुओं में सब्जियों की कीमतें 52.72 फीसदी बढ़ीं, जिसमें सबसे अधिक योगदान प्याज का रहा। इस दौरान प्याज की कीमतों में 293 फीसदी बढ़ोतरी हुई। आलू की कीमतों में 37.34 फीसदी इजाफा हुआ। 

7.59 फीसदी पर पहुंची खुदरा महंगाई दर

खुदरा मुद्रास्फीति की बात करें, तो खाने-पीने का सामान महंगा होने से जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7.59 फीसदी पर पहुंच गयी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2019 में 7.35 फीसदी रही थी। वहीं पिछले साल जनवरी महीने में यह 1.97 फीसदी रही थी।

खुदरा मुद्रास्फीति में यदि खाद्य मुद्रास्फीति की बात की जाए तो जनवरी 2020 में यह 13.63 फीसदी रही जबकि एक साल पहले जनवरी 2019 में इसमें 2.24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, यह दिसंबर 2019 के 14.19 फीसदी के मुकाबले कम हुई है।

बता दें कि रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में ऊंची मुद्रास्फीति का हवाला देते हुए प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया था।

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आधिकारिक आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2020 में 3.1 फीसदी पर आ गई है। साल 2019 की समान अवधि में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.76 फीसदी थी। इससे पिछले महीने दिसंबर में यह 2.59 फीसदी थी। प्याज और आलू जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते यह इजाफा हुआ है। 

 

लगातार तीन महीनों से हो रहा इजाफा

वहीं नवंबर में यह 0.58 फीसदी पर थी। अक्तूबर में यह 0.16 फीसदी थी, सितंबर में 0.33 फीसदी और अगस्त में यह 1.17 फीसदी थी। यानी लगातार तीन महीनों से इसमें इजाफा हो रहा है। इस दौरान गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दिसंबर के 2.32 फीसदी से लगभग तीन गुना बढ़कर 7.8 फीसदी हो गई। खाद्य वस्तुओं में सब्जियों की कीमतें 52.72 फीसदी बढ़ीं, जिसमें सबसे अधिक योगदान प्याज का रहा। इस दौरान प्याज की कीमतों में 293 फीसदी बढ़ोतरी हुई। आलू की कीमतों में 37.34 फीसदी इजाफा हुआ। 

7.59 फीसदी पर पहुंची खुदरा महंगाई दर

खुदरा मुद्रास्फीति की बात करें, तो खाने-पीने का सामान महंगा होने से जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7.59 फीसदी पर पहुंच गयी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2019 में 7.35 फीसदी रही थी। वहीं पिछले साल जनवरी महीने में यह 1.97 फीसदी रही थी।

खुदरा मुद्रास्फीति में यदि खाद्य मुद्रास्फीति की बात की जाए तो जनवरी 2020 में यह 13.63 फीसदी रही जबकि एक साल पहले जनवरी 2019 में इसमें 2.24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, यह दिसंबर 2019 के 14.19 फीसदी के मुकाबले कम हुई है।

बता दें कि रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में ऊंची मुद्रास्फीति का हवाला देते हुए प्रमुख नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया था।





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